मंगल दोष (मांगलिक दोष) के प्रभाव और उपाय
कुंडली में मंगल ग्रह की असंतुलित स्थिति—विशेषकर 1, 4, 7, 8, 12 भाव—को पारंपरिक ज्योतिष में मंगल दोष/मांगलिक दोष कहा गया है।
कुंडली में मंगल ग्रह की असंतुलित स्थिति—विशेषकर 1, 4, 7, 8, 12 भाव—को पारंपरिक ज्योतिष में मंगल दोष/मांगलिक दोष कहा गया है।
विवाह में विलंब जन्म कुंडली में मौजूद ग्रह दोष प्रमुख कारण होते हैं। इस लेख में हम विवाह में विलंब के ज्योतिष कारण पर चर्चा करेंगे।
शनि ग्रह कर्म, अनुशासन और समय का कारक है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या – प्रभाव और उपाय (2025) इसकी दशा संरचना और परीक्षा लेकर आती है।
राशि अनुसार रत्न, लाभ, धारण दिन और मंत्र – सही रत्न धारण मार्गदर्शन जानें दुर्ग भिलाई ज्योतिष लक्ष्मी नारायण से
ज्योतिष में राशि (Zodiac Sign) व्यक्ति के स्वभाव, प्रवृत्ति और जीवन-धारा के संकेत देती है। हर राशि का एक स्वामी ग्रह होता है
Gemstone Expert in India – लक्ष्मी नारायण, भिलाई आपके जन्म कुंडली, ग्रह स्थिति और वर्तमान दशा को देखकर आपको उपयुक्त रत्न की सलाह देते है।
सही रत्न आपके ग्रहों की नकारात्मकता को कम कर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं। रत्न परामर्श से जानें आपकी जन्म कुंडली के अनुसार सही रत्न।
कुंडली परामर्श केवल भविष्य बताने का साधन नहीं है, बल्कि यह आपके जीवन की दिशा, निर्णय और सफलता के लिए एक सटीक मार्गदर्शन है।
2025 में कालसर्प दोष का प्रभाव —एक ऐसा ज्योतिषीय योग जो जन्म कुंडली में राहु और केतु के बीच समाहित ग्रहों के कारण बनता है।